गीत

शब्द कोई भी प्रेम भरा

 
शब्द  कोई  भी    प्रेम  भरा , 

अब मुझ को ना लिखना तुम।

मेरे    जलते     ज़ख़्मों    पे , 

अब  मरहम  ना  रखना तुम ।



टूटा  दिल   उजड़ी बस्ती हूँ , 

गुज़रा   हुआ    ज़माना   हूँ ।

मुरझाए   फूलों   पे   पसरा ,  

ग़म    का    शामियाना   हूँ ।

मैं   टूटी  हुई   सी   सरगम  ,

गीत   कोई  न   रचना  तुम ।

मेरे जलते जख्मों...... 



अपने ज़िंदा ज़ख़्मों को हँस ,

आज   कफ़न   पहनाया  है । 

बरसों से इस बोझिल मनको,

मुश्किल   से   समझाया   है ।

बन्द  खुली  इन   पलकों  में, 

स्वप्न   कोई  न   बुनना  तुम ।

मेरे जलते जख्मों......



इस सूने  मरघट  दिल में ना , 

कोई    ख़्वाब    मुस्काएगा ।

चन्दन   भी  जहरीले   सर्पों ,

जैसी     अगन     लगाएगा ।

मिले अगर जो किसी मोड़ पे,

मिलकर  भी न  मिलना तुम ।

मेरे जलते जख्मों.....