अनुवाद

नन्हीं लड़की

			
हर दरवाज़े पे आकर होती  हूँ खड़ी 
सुनता  नहीं कोई  भी मेरी ख़ामोशी 
देती  हूँ दस्तक लेकिन देखता नहीं कोई 
क्योंकि  मर चुकी  हूँ मैं , मुर्दा हूँ भाई 

सिर्फ सात साल  का थी  जब मरी  थी 
बरसों पहले हिरोशिमा में 
हूँ अभी भी सात ही बरस की  मैं
बच्चे मर जाने पर बड़े नहीं होते 

मेरे बाल सब जल गए थे लपटों में 
धुंधला गयी थी  आँखें ,अंधी  हो गयी  थी  मैं 
मौत ने मेरी हड्डियों को बना दिया था राख 
जिसे बिखेर  दिया था हर सम्त हवा ने 
 

न मुझे फल चाहिए न ही चावल 
न मिठाई चाहिए और न रोटी 
मुझे अपने लिए कुछ नहीं चाहिए 
क्योंकि  मर चुकी  हूँ मैं , मुर्दा हूँ भाई 

मुझे तो चाहिए बस  शान्ति और अमन 
मत लड़ो और अब  तुम जंग रात दिन 
जिससे इस दुनिया का   हरेक बच्चा 
खेल सके खिलखिला सके , रहे ज़िंदा । 

Turkish Poem ; Poet-  Nazim Hikmet  
Translator- I K Angiras